Tuesday, December 30, 2008

बेहतर ढ़ंग से जिए जिंदगी

जिंदगी के प्रति हमारा जैसा नजरिया होगा, हम वैसी ही जिंदगी वयतीत करते हैं. सच तो यह है कि यदि आप सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं तो जीवन के उतार-चढ़ाव व सफलता-असफलता भी आपको विचलित नहीं कर सकती. सच तो यह है कि आशावादी नजरिया आपकी जिंदगी को खुशगवार बना देता है और निराशावादी विचार आपकी जिंदगी को नरक. यदि आप भी मेरी तरह अपनी जिंदगी खुशगवार रखना चाहते हैं तो इस बारे में मेरी टिप्स सिंर्फ आपके लिए है-
निराशा से मुक्त हों :
मन में निराशावादी विचार उठने पर खुद से यह तर्क करें कि क्या किसी समस्या के समाधान में इस तरह के विचार सहायक हो सकते हैं? इस सवाल के जबाव में निश्चित रूप से आपका अंतर्मन यही कहेगा- नहीं, कदापि नहीं. खुद के बारे में नकारात्मक विचारों से मुक्त होकर आशावादी रवैया अपनाएं.

प्रतिकूलता में भी सकारात्मक रवैया :
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सकारात्मक नजरिया अपनाएं. इस बारे में मैं अपना अनुभव आपसे शेयर करना चाहूंगा. एक बार जहां मैं काम करता हूं वहां मेरी नजर में कड़क और मेरे सहकर्मियों की नजर में जल्लाद अधिकारी की नियुक्ति हुई. वह काम के मामले में थोड़ा सख्त तथा समय की पाबंदी पसन्द अधिकारी था. सारा स्टाफ साथ में मैं भी उससे तंग आ गया था. सारा स्टाफ उसके बारे में नकारात्मक विचार रखता था और परेशान था, परन्तु मैंने उसके बारे में सकारात्मक विचार रखते हुए अपना काम करना जारी रखा. इससे वह अधिकारी मेरे काम से अन्दर ही अन्दर तो खुश था परन्तु स्वभाववश मेरे काम की आलोचना मेरे अन्य सहकर्मियों से करता था. मैंने इस प्रतिकूलता में भी अपना सकारात्मक रवैया अपनाए रखा और मस्त रहा. जबकि मेरे सहकर्मी जो कि नकारात्मक रवैया अपनाए हुए थे, परेशान रहते थे. मैं उनसे कहा करता था कि अपने काम और समय पालन का ध्यान रखो. कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. कुछ ने तो इसे अपनाया और अपने स्वभाववश न अपना सके और उस अधिकारी के स्थानान्तरण तक परेशान रहे.

वास्तविक लक्ष्य निर्धारण करें:
उन्हीं लक्ष्यों को आप निर्धारित करें, जिन्हें आप एक तयशुदा वक्त में पूरा कर सकते हैं. कई कार्यों को एक साथ करने की कोशिश बिलकुल भी न करें, वरना आप भी मेरी एक सहकर्मी की तरह परेशान हो जाएंगे. वह भी एक समय में कई-कई प्रोजेक्ट पर काम करने लगती है. नतीजा कोई भी प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो पाता और वह कुंठित हो जाती है. एक साथ कई काम हाथ में लेने से आप किसी भी कार्य को न्यायोचित ढ़ंग से पूरी ईमानदारी से नहीं कर पाएंगे. इसलिए प्रत्येक कार्य को निष्पादित करने के लिएलक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है. फुर्सत के क्षणों में अपने किसी शौक को पूरा करें. संगीत सुनें और अपनी पसंदीदा किताब पढ़ें, पर याद रखें कि नकारात्मक विचार वाले व्यक्तियों और वस्तुओं के बीच अपना कीमती वक्त बर्बाद बिलकुल भी न करें.

प्रेरणादायक घटनाएं दर्ज करें:
सुबह की शुरूआत सकारात्मक चिन्तन से करें. प्रतिदिन किसी पत्र-पत्रिका में प्रकाशित किसी प्रेरणादायक घटना या लेख को एक डायरी में अवश्य दर्ज करें. इससे आपका पूरा दिन खुशगवार रहेगा और आपका मन भी प्रफुल्लित रहेगा.

सफलता की कामना करें:
मन में सदैव ही सफलता की कामना करें. याद रखें, सफलता का सबसे पहला विचार मन में ही पनपता है. फिर आप इस विचार को कार्यरूप में परिवर्तित करते हैं. सफलता की कामना भी आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.

कृतज्ञता को याद रखें:
जो लोग आपके व्यक्तित्व के विकास में सहायक रहें हैं या फिर परोक्ष-अपरोक्ष में मददगार रहे हैं या फिर जिन लोगों ने आपके संकट के समय में साथ दिया है, उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखें. ऐसे लोगों को किसी अवसर विशेष पर इस बात से जरूर अवगत कराएं कि आपके सहयोग के लिए मैं कितना शुक्रगुजार हूं. इसी तरह आप प्रकृति और अदृश्य सत्ता के प्रति भी अपना शुक्रगुजार होना प्रकट कर सकते हैं.
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