Tuesday, December 30, 2008

जरूरी है समय प्रबंधन

समय की कमी का रोना अधिकतर लोग रोते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि समय तो सभी के पास चौबीस घंटे का ही है, फिर कुछ लोगों का हर कार्य समय पर कैसे पूरा हो जाता है. वहीं कुछ लोग समय पर कार्य पूरा न होने के कारण हमेशा नर्वस रहते हैं, परेशान रहते हैं, टेंशन में रहते हैं. दरअसल इसकी मूल वजह यह है कि वे अपने समय का प्रबंधन ठीक ढ़ंग से नहीं कर पा रहे हैं. आइए समय प्रबंधन के बारे में हम कुछ चर्चा कर लें.
समझें समय का महत्व:
समय प्रबंधन का मतलब है- किसी कार्य को अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित समय के भीतर पूरा कर लेना, जिससे बिना बात के टेंशन एवं परेशानी से बचा जा सके. दरअसल हमारे अधिकतर कार्य इसलिए पूरे नहीं हो पाते, क्योंकि या तो हम उसका दायरा काफी फैला देते हैं या फिर कार्य को टालने की ऐसी आदत पाल लेते हैं, जिससे कार्य हमेशा अधर में लटका रहता है और हमारी टेंशन बढ़ जाती है.

तय करें प्राथमिकताएं:
हालांकि कुछ लोग ऐसा कहते हें कि वे अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद समय प्रबंधन नहीं कर पाते हैं. सच तो यह है कि उनके साथ ऐसा इसलिए होता हे क्योंकि उनकी प्राथमिकताएं सही नहीं होती हैं. वे यह समझ ही नहीं पाते कि किस कार्य को पहले करना है और किस कार्य को बाद में. यही नहीं, वे इस बात का आकलन भी ठीक से नहीं कर पाते कि एक दिन में उनको जितने कार्य निपटाने हैं, उसमें कितना समय खर्च होगा? क्या प्रत्येक कार्य के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा? दरअसल, लोग प्राय: अपनी क्षमता से ज्यादा कार्यों के लिए हामी भर देते हैं. लेकिन जब उन कार्यों के लिए समय नहीं निकाल पाते तो वे परेशान हो जाते है, टेंशन में आ जाते हैं.

मुश्किल नहीं समय प्रबंधन:
समय प्रबंधन कोई एक दिन में सीखने की चीज न होकर एक व्यवहारिक एप्रोच है। फिर भी, यदि हम कुछ बातों पर अमल करें तो समय को ठीक से प्रबंध कैसा किया जाए, सीख सकते हैं, अपने व्यवहार में ला सकते हैं. जैसे कि :-

  • अगले दिन कौन-कौन से कार्य निपटाने हैं, इसकी एक रूपरेखा रात को ही सोने से पहले बना लें। इससे न सिर्फ सुबह की हड़बड़ी से बचेंगे, बल्कि आपके सभी कार्य आसानी से निपट जाएंगे।
  • अपने कार्यों का कॉम्बिनेशन इस तरह बनाएं, जिससे कि आप उन्हें बिना किसी दबाव के खुशी-खुशी कर सकें।
  • काम को काम समझें बोझ नहीं। यदि कारणवश वह पूरा न हो पाए, बेवजह इमोशनल न हों। इससे आप दूसरे कार्यों को पूरी क्षमता के साथ नहीं कर पाएंगे.
  • काम का दायरा बेवजह न फैलाएं। एक काम को पूरा करने के पश्चात ही दूसरे काम को हाथ में लें.

तरीका परफेक्ट ग्रुमिंग का:
स्वयं को अच्छी तरह ग्रुम करने के लिए इन बातों को गांठ बांध लेना चाहिए :-

  • किसी भी कार्य को पूरी ईमानदारी एवं निष्ठापूर्वक मन लगाकर करें। बोझिल मन से नहीं।
  • कार्य को कभी बोझ न समझें, बल्कि पूजा की तरह भक्तिभाव से करें।
  • अपने अनुभवों से जो कुछ सीखा और समझा है, उस पर विश्वास करें।
  • अपनी क्षमताओं को समझें। आत्म-सम्मान की भावना विकसित करें.
  • प्यार की भाषा बोलें।
  • किसी के साथ ऐसा व्यवहार बिलकुल भी न करें, जैसा कि आप अपने लिए नहीं चाहतें हैं।
  • समझदारी और विश्वास का सही इस्तेमाल करना सीखें। किसी की बातों पर पूरी तरह भरोसा तो करें, लेकिन मन में एक प्रश्न-चिह्न भी रखें। इससे आप धोखा नहीं खाएंगे.
  • दुनिया में अच्छाई के साथ बुराई भी है, इसलिए परिस्थितियों से घबराएं नहीं। लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें।
  • हर समस्या के एक से ज्यादा समाधान हो सकते हैं, इसलिए अनुरूपता बिन्दु (Conflict point) से परे सोचें। संभव है समाधान वहीं कहीं छिपा हो.
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