Thursday, September 29, 2011

नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा के नाम




सुरासम्पूर्णकलशंरुधिप्लूतमेवच।
दधानाहस्तपदमाभयांकूष्माण्डाशुभदास्तुमे॥


ध्यान:-
वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभांअनाहत स्थितांचतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु चापबाणपदमसुधाकलशचक्र गदा जपवटीधराम्॥
पटाम्बरपरिधानांकमनीयाकृदुहगस्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर हार केयूर किंकिणरत्‍‌नकुण्डलमण्डिताम्।
प्रफुल्ल वदनांनारू चिकुकांकांत कपोलांतुंग कूचाम्।
कोलांगीस्मेरमुखींक्षीणकटिनिम्ननाभिनितम्बनीम्॥


स्त्रोत:-
दुर्गतिनाशिनी त्वंहिदारिद्रादिविनाशिनीम्।
जयंदाधनदांकूष्माण्डेप्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्रीजगदाधाररूपणीम्।
चराचरेश्वरीकूष्माण्डेप्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरीत्वंहिदु:ख शोक निवारिणाम्।
परमानंदमयीकूष्माण्डेप्रणमाम्यहम्॥


कवच:-
हसरै मेशिर: पातुकूष्माण्डेभवनाशिनीम्।
हसलकरींनेत्रथ,हसरौश्चललाटकम्॥

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