Friday, September 25, 2015

जो जीता वही सिकन्दर

हमारी सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मानकर बैठ जाना है, जबकि सफल होने का सबसे निश्चित और सटीक तरीका है, निरंतर एक और बार प्रयास करना.

इस संबंध में मुझे एक कहानी याद आती है जो मेरे पिताजी अक्सर मुझे सुनाया करते थे, जब भी मैं निराश या हताश होता था.

हमलोग बरेली में रहते थे. मेरे पिताजी रेलवे वर्कशॉप, इज्जतनगर में रेलकर्मी थे. हमें न्यू मॉडल कालोनी में रेलवे आवास मिला हुआ था. मैं अपने स्कूली क्रिकेट टीम का आलराउडर क्रिकेटर हुआ करता था. उसी न्यू मॉडल कालोनी क्रिकेट ग्राउंड में हम खेला करते थे. शुरूआती दौर में जब कभी मैं रन नहीं बना पाता था या विकेट नहीं ले पाता था, तो मैं काफी निराश होता था. मेरे पिताजी सदैव से मेरे प्रेरणास्रोत रहे. आज भी वे सदेह न होकर भी सदैव मेरे मार्गदर्शक हैं. वे उस छोटी सी चींटी या मकड़ी की कहानियां सुनाया करते थे कि कैसे उन्होंने अथक प्रयास से अपने लक्ष्य को पाया. उनकी प्रेरणा से ही स्कूली क्रिकेट में कई रिकार्ड अपने नाम कर सका.

अगर मैं भी शुरूआती दौर में निराश होकर निरंतर प्रयास नहीं करता तो वह रिकार्ड नहीं बना पाता जो आगे चलकर बना पाया. सिकन्दर भी महान नहीं बन पाता यदि वह पहली या दूसरी हार के बाद निराश हो जाता. निरंतर प्रयास से ही वह विश्वविजयी बन सका और आज इसी कारण यह कहावत भी प्रचलित है कि "जो जीता वही सिकन्दर".
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