Saturday, September 26, 2015

प्रतिद्वंदिता

ऑफिस में हमारे सहकर्मी हमारे प्रतिद्वंदी हो सकते हैं, पर दुश्मन नहीं. यह हमें अपने दिमाग में सदैव रखनी चाहिए. अक्सर लोग अपने प्रतिद्वंदी को अपना दुश्मन भी समझ लेते हैं, जो गलत है.

याद रखें... प्रतिद्वंदिता सदैव आपको और अधिक बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करती है. अगर हम अपने प्रतिद्वंदी को अपना दुश्मन समझेंगे तो इससे हमारा आपसी रिश्ता तो खराब होगा ही बल्कि हम अपना अच्छा परफॉर्मेंस भी नहीं दे पाएंगे. इसलिए जरूरी है हम ऑफिस में आपसी सहयोग की भावना से काम करें न कि दुश्मनी का भाव लेकर.

@ मेरे सभी सहकर्मियों को समर्पित. 
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