Sunday, October 4, 2015

कल पर न टालें


काम को कल पर टालने वाले जीव हमारे आस-पास बहुतायत संख्या में पाए जाते हैं. जिसे देखो वो आज का काम कल पर टालने पर तुला हुआ है. क्योंकि उनका कहना है कि आज तो समय हैं ही नहीं. सरकारी कार्यालयों में यह दृश्य आपको अक्सर देखने में मिल ही जाएगा. परन्तु मेरा मानना है कि कोई भी काम कल पर टालने की आदत से हमें बचना चाहिए, क्योंकि हम सभी जानते हैं कि कल कभी नहीं आता. और क्या पता कि यदि आ भी जाए तो क्या निश्चित रूप से हम जानते हैं कि कल हम रहेंगे ही. इस बारे में आपको एक कहानी के माध्यम से संदेश देने का प्रयास करता हूं-

बात उन दिनों की है, जब पाण्डव अज्ञातवास में थे. एक दिन सुबह ही सुबह एक याचक पाण्डव ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर के पास आता है और उनसे कुछ भिक्षा मांगता है. उस समय युधिष्ठर और भीम दोनों भाई चारपाई बुन रहे थे, इसलिए युधिष्ठर ने याचक से कहा - भाई! एक काम कर. तू कल आना और कल लेकर जाना. अभी मैं ज़रा चारपाई बुन लूँ.

पाण्डवों में दूसरे नंबर के महाबली भीम को तो आप जानते ही हैं. वैसे तो भीम के बारे प्रचलित है कि वे महापेटू और महाबलशाली थे. पूरी महाभारत में उनके बारे में यही महिमा मंडन है कि जहाँ ताकत का काम पड़े वहां भीम हैं, परन्तु जहां बुद्धि वाले काम पड़े वहां उनका क्या काम. खैर साब जैसे ही युधिष्ठर ने याचक को कल आने को कहा तो भीम तुरंत उठे और पास पड़ा हुआ नगाड़ा उठाया और जोर-जोर से बजाते हुए बाहर की तरफ़ भागे. युधिष्ठर थोड़ा नाराज हुए. उन्होंने भीम से पूछा - भाई भीम, ये तू चारपाई बुनना छोड़ कर, अचानक ढोल बजाता हुआ बाहर की तरफ़ क्यों भाग रहा है. बात क्या है? भीम बोले - सबको सूचना देनी है कि मेरे बड़े भाई ने समय को जीत लिया है और एक याचक  को आश्वासन दिया है कि कल आकर भीख ले जाए. जैसे उनको पक्का मालूम है कि कल आयेगा ही. ये तो सही में नगाड़े बजाने जैसी ही बात है. युधिष्ठर को तुरंत बात समझ में आ गई. आज उनको पता लगा कि ये भी कोई कोरा पहलवान नहीं है बल्कि बुद्धि भी रखता है. आख़िर तो उनका ही भाई है ना. वे उठे और दौड़ कर उस याचक को पकडा और क्षमा मांगते हुए उनसे इच्छित वस्तु मांगने के लिए प्रार्थना की.

इस छोटे से दृष्टांत से हमें ज्ञान मिलता है कि जो करना है वो अभी करना है. कल पर टालना तो तभी हो सकता है, जब हमको मालूम हो कि कल पक्के से आयेगा ही. और कल हम भी होंगे? हो सकता है कल तो आए पर हम ना हों. हममे से बहुत से लोग हैं जो आज का काम कल पर टाल देते हैं. उनकी ऐसी ही टालू प्रवृत्ति के कारण एक दिन ऐसा होता है, जब वे काम के बोझ से दब जाते हैं तो उनकी शक्ल देखते ही बनती है. फिर ऐसे व्यक्ति समय की कमी का रोना रोते हैं. वहीं आपको कुछ ऐसे भी व्यक्ति मिल जाएंगे, जो अपना काम समय पर निपटाकर प्रसन्नचित्त रहते हैं. लगता ही नहीं कि उन पर कोई बोझ हो.

क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों हैं? समय तो सभी के पास 24 घंटे का ही होता है फिर कुछ लोग हर काम को समय पर कैसे पूरा कर लेते हैं और प्रसन्नचित्त रहते हैं, वहीं कुछ लोगों के पास काम का अंबार लगा रहता है और वे टेंशन में रहते हैं, शूगर-बीपी के रोगी हो जाते हैं. इसका मूल कारण क्या है? क्यों कुछ लोग टेंशनमुक्त रहते है और कुछ लोग टेंशनग्रस्त. मेरे ख्याल से इसका मूल कारण समय प्रबंधन ही है. जो समय का सही तरह से प्रबंधन कर लेते हैं वे टेंशनमुक्त होते हैं और जो समय का सही प्रबंधन नहीं कर पाते वे टेंशनग्रसित रहते हैं. क्योंकि उनमें आज का काम कल पर छोड़ने की आदत है. इसलिए मेरा मानना है कि आज का काम कल पर न टालें, क्योंकि कल कभी आता नहीं. यदि आ ही गया तो क्या निश्चित कि कल हम हों ही. चलो मान लिया कि कल हम हों तो कल का कम कब करेंगे क्योंकि इसमें आज का काम भी तो जुड़ जाएगा. यानी उसमें वृद्धि होती जाएगी. यदि हम अपने छोटे-छोटे कार्यों को भी इस तरह व्यवस्थित रूप से करते चले जाएं और कल पर ना छोडे़ तो आप विश्वास करें कि हमारे दैनिक जीवन में इतना जबरदस्त बदलाव आ जाएगा कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते. जब कोई काम कल के लिए लंबित नहीं होगा तो जीवन हल्का लगने लगेगा. इससे मित्रों, बच्चों, पति/पत्नी, माँ-बाप और समाज के प्रति आपके व्यवहार में काफी अंतर आएगा.
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