Saturday, October 10, 2015

सफलता का मूलमंत्र


सफल होना कौन नहीं चाहता. परन्तु क्या सफलता आधी-अधूरी मेहनत से प्राप्त की जा सकती है? नहीं न. सफलता प्राप्त करने के लिए हमें अपना सौ प्रतिशत लगाना जरूरी होता है. कड़ी मेहनत और पूरी एकाग्रता से ही सफलता हासिल की जा सकती है. हमें अपना काम पूरी तन्मयता से करना चाहिए. पूरे मनोयोग से किए गए कार्य से ही हम सफल हो पाते हैं. अन्यथा हम बिखरे-बिखरे से रहते हैं. कार्य को समग्रता से करने पर ही हमें आनन्द की अनुभूति भी होती है.

गीता में कृष्ण ने कर्म के सिद्धान्त को प्रतिपादित करते हुए यही कहा है कि कार्य करते वक्त लक्ष्य को भी भूलाकर पूर्णता से कार्य करें. कार्य करने वाले को अपनी ऊर्जा को अन्यत्र नहीं जाने देना चाहिए. जब हम कार्य को बेमन से करते है तो स्वयं की निगाह में गिर जाते है तथा खुद को ही अच्छा नहीं लगता है.

कार्य को सफलता पूर्वक करने की खुशी हमें तत्क्षण मिल जाती है वही उसका ईनाम है. कार्य को पूर्णता से करने पर भी यदि हमें कीन्हीं कारणों से असफलता मिलती भी है तो वह इतना दुःख नहीं देती है, जितना कि बेमन से किए गए कार्य को करने के बाद मिलने वाली असफलता से होती है. क्योंकि मन में कसक तो रहती ही है कि हमने पूरे मनोयोग से काम नहीं किया था. सफलता के लिए हमें एकाग्रचित्त होकर अपना कुछ दांव पर लगाना होता है.

अंत में केवल इतना ही कहना है कि सफल होने के लिए कार्य के प्रति पूरी निष्ठा, लगन, एकाग्रता, दूरदृष्टि और अनुशासन एकमात्र मूलमंत्र है. जिसने इसे साध लिया सफलता उसके कदम चूमेगी.
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