Friday, August 26, 2016

एकता की शक्ति


हमारे यहां एक कहावत बहुत प्रचलित है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता परन्तु कई चने मिलकर भाड़ क्या पूरी भट्टी तोड़ सकते हैं। यानी एकता में अपार शक्ति होती है। जहां एकता है और जहां हम एक से दो हुए हमारी शक्ति दुगनी नहीं, कई गुना हो जाती है। हमें हर परिस्थिति में अपनी एकता को बनाए रखना है। इस बारे में दो दृष्टांतों के माध्यम से अपनी बात कहने की कोशिश करता हूं-
एक बार ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में इस एकता की अनोखी मिसाल देखने को मिली, जब एक आदमी की जान बचाने के लिए लोगों ने मिलकर ट्रेन को ही झुका दिया। यह हैरतअंगेज वाकया पर्थ के पास स्टर्लिंग रेलवे स्टेशन का है। स्टर्लिंग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय एक व्यक्ति का पैर फिसल गया। ट्रेन खड़ी थी और वह व्यक्ति प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच बुरी तरह फंस चुका था। पहले तो एक-दो लोगों ने मिलकर उस व्यक्ति को निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। ट्रेन में सवार लोगों को ट्रेन की दूसरी साइड खड़ा होने को कहा गया, ताकि व्यक्ति के पैर की ओर से ट्रेन थोड़ा भी ऊपर उठे तो उसे निकाला जा सके। लेकिन यह योजना भी विफल हो गई। इतने में ट्रेन के सभी यात्री नीचे उतर चुके थे। किसी यात्री ने ट्रेन को धक्का देकर थोड़ा तिरछा करने का सुझाव दिया। इसके बाद ट्रेन के सभी यात्री और रेल कर्मचारी मिलकर ट्रेन को धक्का देने में जुट गए। लोगों की सामूहिक ताकत ने असर दिखाया। कई हजार टन भारी ट्रेन दूसरी ओर ज्यों ही झुकी, उसके नीचे फंसे यात्री को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों की तत्परता से ही हादसे को रोक एक आदमी की जिंदगी बचाई जा सकी। इस पूरे रेस्क्यू मिशन के दौरान ड्राइवर को भी अलर्ट किया जा चुका था, ताकि वह ट्रेन चलाना ना शुरू कर दे। इस प्रकार सामूहिक बल से, एकता से असंभव कार्य भी संभव हो सका।
दूसरा दृष्टांत जंगल की एक कहानी के माध्यम से बताना चाहता हूं। भैंसों का एक झुंड अपनी मस्ती में चला जा रहा था। उस झुंड में एक बच्चा भैंसा भी था, जो काफी नटखट था। वह बार-बार अपने झुंड से अलग हो जाता था। एक बड़ा भैसा, जो शायद उसका पिता था, उसे बार-बार वापस झुंड में करता था। इससे बच्चा खीज गया और कहने लगा- क्या पिता जी, आप मुझे स्वछंद खेलने भी नहीं देते। इस जंगल में ऐसी कौन सी चीज है जिससे डरने की ज़रुरत है?
पिता भैंसा बोला- बेटा, जब तक तुम हमारे झुंड में हो, कोई खतरा नहीं है। बस झुंड से अलग न होना। सामने इन शेरों को देख रहे हो, बस इनसे सावधान रहना।

बच्चा बोला- अगर कभी मुझे शेर ने दौड़ाया तो मैं तेजी से दौड़ता हुआ भाग जाऊँगा।
पिता ने कहा- यही गलती मत करना।
बच्चे ने कहा- क्यों? वे तो बहुत खतरनाक होते हैं। मुझे मार देंगे तो। भला मैं भाग कर अपनी जान क्यों ना बचाऊं?
पिता ने कहा- यदि तुम भागोगे तो शेर तुम्हारा पीछा करेंगे। भागते समय वे तुम्हारी पीठ पर आसानी से हमला कर सकते हैं और तुम्हे नीचे गिरा सकते हैं। और एक बार तुम गिर गए तो तुम्हें कोई भी नहीं बचा सकता।
बच्चा घबरा गया। उसने पूछा- ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए?
पिता ने कहा- ऐसी स्थिति में अपनी जगह डट कर खड़े हो जाना और उसे ये दिखाना कि तुम जरा भी डरे हुए नहीं हो। उसे देखकर अपनी सींगों को हिलाना, नथुनों से तेज-तेज फुफकारना और खुरों को जमीन पर पटकना। अगर तब भी शेर ना जाएं, तो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ना। और तेजी से अपनी पूरी ताकत के साथ उस पर हमला कर देना।
बच्चा नाराज होते हुए बोला- पिताजी, ये तो पागलपन है। ऐसा करने में तो बहुत खतरा है। अगर शेर ने पलट कर मुझ पर हमला कर दिया तो
पिता ने कहा- बेटे, अपने चारों तरफ देखो। तुम्हारे साथ तुम्हारा ताकतवर कुनबा है। कभी भी डरना नहीं। हम सब तुम्हारे साथ हैं। बस इतना याद रखना कि मुसीबत का सामना करने की बजायेतुम भाग मत खड़े होना, वरना हम तुम्हें नहीं बचा पाएंगे। और यदि तुम साहस दिखाते हो और मुसीबत से लड़ते हो तो हम मदद के लिए ठीक तुम्हारे पीछे खड़े होंगे। हमारी एकता के सामने शेर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

सीख- यदि हम अपने परिवार की, समाज की एवं देश की एकता बनाए रखते हैं तो कोई भी बड़े से बड़ा कार्य आसानी से संपन्न कर सकते हैं। इसके साथ ही कोई दुश्मन भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। क्योंकि हमें मालूम है कि हमारा पूरा परिवार, समाज, देश हमारे पीछे खड़ा है। और यदि हम स्वार्थवश या किन्हीं कारणों से एकल हुए तो एक छोटा सा दुश्मन भी हमें हानि पहुंचा सकता है।  

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