Saturday, September 10, 2016

धारा 370 मुक्त हो कश्मीर हमारा

मोदी जी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान धारा 370 का मसला व्यापक राष्ट्रीय हित में उठाया था, लेकिन उस पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद राज्य की अधिकांश आबादी का विकास ही होगा जो अब तक मुख्यधारा से कटी हुई है।  
दरअसल, धारा 370 को लागू करते समय तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी ने देश को भरोसा दिलाया था कि यह व्यवस्था अस्थायी रहेगी, जो समय के साथ धीरे-धीरे स्वतः समाप्त हो जाएगी, लेकिन यह तो अब लगता है कि स्थायी हो गई है। अब तक किसी भी सरकार ने इसे हटाने का प्रयास करना तो दूर, सोचा तक नहीं।

तत्कालीन कानून मंत्री डॉ. भीमराव अम्बेडकर कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने शेख़ अब्दुल्ला को लताड़ते हुए साफ़ शब्दों में कह दिया था, "आप चाहते हैं, भारत आपकी सीमाओं की रक्षा करे, वह आपके यहां सड़कें बनाए, आपको राशन दे और कश्मीर का वही दर्ज़ा हो जो भारत का है! लेकिन भारत के पास सीमित अधिकार हों और जनता का कश्मीर पर कोई अधिकार नहीं हो। ऐसे प्रस्ताव को मंज़ूरी देना देश के हितों से दग़ाबाज़ी करने जैसा है और मैं क़ानून मंत्री होते हुए ऐसा कभी नहीं करूंगा।" 

यह नेहरू जी की पहल का परिणाम था कि कश्मीर को धारा 370 के अंतर्गत रखा गया। इस प्रावधान का डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पुरज़ोर विरोध किया था। मुखर्जी ने नेहरू से कहा था कि आप जो करने जा रहे हैं, वह नासूर बन जाएगा और किसी दिन देश को विखंडित कर देगा। यह प्रावधान उन लोगों को मज़बूत करेगा, जो कहते कि भारत एक देश नहीं, बल्कि कई राष्ट्रों का समूह है।


आज घाटी में जो हालात हैं, उन्हें देखकर लगता है कि मुखर्जी की आशंका ग़लत नहीं थीधारा 370 के कारण ही राज्य मुख्यधारा से जुडऩे की बजाय अलगाववाद की ओर मुड़ गया। यानी जहां तिरंगे का अपमान होता है, बच्चों के हाथों में किताबों की जगह पत्थर पकड़ाए जाते हैं, देशविरोधी नारे लगाए जाते हैं, भारतीय सैनिकों की मौत की कामना की जाती है। इस धारा 370 का ही दुष्परिणाम है कि इस देश के अंदर ही कश्मीर एक मिनी पाकिस्तान बन गया है।


अब समय आ गया है कि इस धारा को हटाया जाए। अगर वाक़ई कश्मीर समस्या सदा के लिए हल करना है तो भारतीय संसद को ज़बरदस्ती इस धारा 370 को कूड़ेदान में डाल ही देना चाहिए। इसके लिए सरकार और विपक्ष में बैठे सभी लोगों को मिलकर करना होगा। यह बात कश्मीर के तथाकथित आकाओं को भी मालूम है कि पहले तो वे भारत से आजाद हो ही नहीं सकते, और यदि हो भी गए तो आजाद होकर सुखी नहीं रह सकते। यह उन्होंने पिछली बाढ़ से समय पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर की हालात को देखा ही है। अलगाववादी और दूसरे नेता यह अच्छी तरह से जानते हैं कि कश्मीर भारत से अलग नहीं हो सकता। लिहाज़ा, अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए आज़ादी का राग आलापते रहते हैं। भारत देश के पैसे पर पल रहे ये लोग, मलाई काट रहे हैं। अब समय आ गया है कि इनको मलाई खिलाना बंद किया जाए और उन्हें उनकी औकात में रहना सिखाया जाए। यह कार्य यदि मोदी सरकार में नहीं हुआ तो समझो कभी नहीं हो पाएगा।
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